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ताराचंद बड़जात्या

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#10may #21sep  ताराचंद बड़जात्या जन्म: 10 मई 1914, कुचामन सिटी मृत्यु: 21 सितंबर 1992 (आयु 78 वर्ष), भारत बच्चे: राज कुमार बड़जात्या संस्था की स्थापना: राजश्री प्रोडक्शंस पोते: सूरज बड़जात्या पुरस्कार: सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार ताराचंद बड़जात्या (10 मई 1914 - 21 सितंबर 1992) एक भारतीय फिल्म निर्माता थे। उन्होंने 1960 से लेकर 1980 के दशक तक कई हिंदी फ़िल्में बनाईं। उन्होंने राजश्री प्रोडक्शंस की स्थापना की जो आज भी फ़िल्में बना रही है। उनका मुख्य आधार पारिवारिक मूल्यों पर आधारित पारिवारिक फ़िल्में थीं। उनका जन्म 1914 में राजस्थान के कुचामन शहर में एक मारवाड़ी जैन परिवार में हुआ था। उन्होंने विद्यासागर कॉलेज, कलकत्ता से पढ़ाई की।  उन्होंने 1947 में राजश्री पिक्चर्स (पी) लिमिटेड की स्थापना की। उनके द्वारा निर्मित कुछ उल्लेखनीय फिल्में हैं दोस्ती, जीवन मृत्यु, उपहार, पिया का घर, सौदागर, गीत गाता चल, तपस्या, चितचोर, दुल्हन वही जो पिया मन भाये, अंखियों के झरोखों से, सावन को आने दो, तराना, नदिया  के ...

पंकज मालिक (जनम)

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पंकज मालिक 🎂10 मई 1905 ⚰️19 फरवरी 1978 भारतीय सिनेमा के महान गायक और संगीतकार पंकज मलिक की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए: एक श्रद्धांजलि  जन्म10 मई 1905, कोलकाता मृत्यु की जगह और तारीख: 19 फ़रवरी 1978, कोलकाता माता-पिता: मोनीमोहन मलिक, मोनोमोहिनी मलिक  पंकज मलिक, जिन्हें पंकज कुमार मलिक  के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय संगीतकार और पार्श्व गायक थे, जो पार्श्व गायन के आगमन के समय बंगाली और हिंदी सिनेमा में फिल्म संगीत के अग्रदूत थे, साथ ही रवींद्र संगीत के शुरुआती प्रतिपादक भी थे।  🏆पंकज मलिक को 1970 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया और उसके बाद 1972 में भारतीय सिनेमा में आजीवन योगदान के लिए दादा साहब फाल्के पुरस्कार (भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला सिनेमा का सर्वोच्च पुरस्कार) से सम्मानित किया गया।  पंकज मलिक का जन्म 10 मई 1905 को कोलकाता, बंगाल प्रेसीडेंसी, अविभाजित भारत, अब पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में मोनिमोहन मलिक और मोनोमोहिनी के घर हुआ था। उनके पिता की पारंपरिक बंगाली संगीत में गहरी रुचि थी। उन्होंने दुर्गादास बंदोपाध्याय के संरक्षण में भारतीय शा...

रोशन तनेजा

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रोशन तनेजा (1931 - 10 मई 2019) भारत में अभिनय सिखाने में अग्रणी थे। उन्होंने भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान में अभिनय विभाग की स्थापना की और मुंबई, भारत में रोशन तनेजा स्कूल ऑफ एक्टिंग की स्थापना की । उन्होंने भारतीय फिल्म उद्योग के कई अभिनेताओं को प्रशिक्षित किया। उन्होंने हिंदी फिल्म अभी तो जी लें (1977) का लेखन और निर्देशन भी किया। तनेजा का परिवार उत्तर पश्चिमी सीमांत प्रांत (अब पाकिस्तान में ) के कुलाची से भारत के कानपुर आ गया , जहाँ उनके पिता एक चीनी मिल में काम करते थे। भारत के विभाजन के बाद उनका परिवार लखनऊ में बस गया और वे दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने चले गये। स्नातक करने के बाद, वह एक छात्रवृत्ति के तहत न्यूयॉर्क में अभिनय का अध्ययन करने गए । उन्होंने नेबरहुड प्लेहाउस स्कूल ऑफ थिएटर में निर्देशक सिडनी पोलाक और सैंडफोर्ड मीस्नर से प्रशिक्षण लिया और मेथड एक्टिंग सीखी । वह भारत लौट आए और 1963 में भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई), पूना में अभिनय विभाग की स्थापना की। उन्होंने 1975 तक संस्थान में पढ़ाया, दो साल के अभिनय पाठ्यक्रम का संचालन किया, जहां कक्ष...

ताराचंद बड़जात्या

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#10may  #21sep  🎂जन्म 10 मई 1914,  कुचामन सिटी ⚰️मृत्य: 21 सितंबर 1992,  बच्चे:  राजकुमार बड़जात्या पोता या नाती: सूरज बड़जात्या इस संगठन की स्थापना की:  राजश्री प्रोडक्शन शिक्षा: विद्यासागर कालेज  प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता ताराचंद बड़जात्या की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि ताराचंद बड़जात्या भारत के प्रसिद्ध फिल्म-निर्माता थे। उन्होने सन 1960 के दशक से आरम्भ करके 1980 के दशक तक अनेकों हिन्दी फिल्में बनायी। वे राजश्री प्रोडक्शन्स के संस्थापक थे। वे मानवीय मूल्यों पर आधारित पारिवारिक फिल्में बनाने में सिद्धहस्त थे। ताराचन्द बरजात्या का जन्म 10 मई 1914 को राजस्थान में हुआ था। उन्होंने कोलकाता के विद्यासागर कॉलेज से स्नातक की परीक्षा पास करके 19 वर्ष की आयु में 1933 में मोतीमहल थियेटर में बिना किसी वेतन के एक प्रशिक्षु के रूप में काम करने लगे कडी मेहनत और लगन से उन्होंने अपने मालिक के लिए सफलता अर्जित की. उनकी आर्थिक मदद से ही 14 साल बाद 15 अगस्त 1947 में उन्होंने राजश्री पिक्चर्स प्रा. लिमिटेड की स्थापना की और कम लागत, देशी कलेवर...

पंडित शिव कुमार

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#10may #13jan  पंडित शिवकुमार शर्मा   🎂13जनवरी, 1938 जम्मू,  ⚰️10 मई 2022 भारत प्रख्यात भारतीय संतूर वादक हैं।संतूर एक कश्मीरी लोक वाद्य होता है।इनका जन्म जम्मू में गायक पंडित उमा दत्त शर्मा के घर हुआ था।1999में रीडिफ.कॉम को दिये एक साक्षातकार में उन्होंने बताया कि इनके पिता ने इन्हें तबला और गायन की शिक्षा तब से आरंभ कर दी थी, जब ये मात्र पाँच वर्ष के थे।इनके पिता ने संतूर वाद्य पर अत्यधिक शोध किया और यह दृढ़ निश्चय किया कि शिवकुमार प्रथम भारतीय बनें जो भारतीय शास्त्रीय संगीत को संतूर पर बजायें। तब इन्होंने 13 वर्ष की आयु से ही संतूर बजाना आरंभ कियाऔर आगे चलकर इनके पिता का स्वप्न पूरा हुआ। इन्होंने अपना पहला कार्यक्रम बंबई में 1955 में किया था। शर्मा जी को कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मान एवं पुरस्कार मिल चुके हैं। इन्हें १९८५ में बाल्टीमोर, संयुक्त राज्य की मानद नागरिकता भी मिल चुकी है।इसके अलावा इन्हें 1986 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1999 में पद्मश्री, एवं 2001 में पद्म विभूषण से भी अलंकृत किया गया था। शिवकुमार शर्मा का निधन 84 वर्ष के थे। ...