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गोविंद मूनिस(मृत्यु)

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गोविंद मूनिस🎂02 जनवरी 1929⚰️05 मई 2010  भारतीय सिनेमा के मशहूर फिल्मकार गोविंद मूनिस को उनकी जयंती पर याद करते हुए: एक श्रद्धांजलि   गोविंद मूनिस (02 जनवरी 1929 - 05 मई 2010) हिंदी फिल्मों के निर्देशक, कहानीकार, स्क्रीन, संवाद और गीतकार थे। उन्हें साजन का दर्द (1995), जवानी की लहरें (1988) बाबुल (1986), ससुराल (1984), नदिया के पार (1982) में उनके निर्देशन के लिए जाना जाता है।  उन्हें एक गांव की कहानी (1957), चलती का नाम गाड़ी (1958), दोस्ती (1964), आसरा और मेरे लाल (1966), रात और दिन (1967), जीवन मृत्यु (1970) जैसी कई हिंदी फिल्मों में कहानी, पटकथा और संवाद लिखने के लिए भी जाना जाता है।  गोविंद मूनिस का जन्म 02 जनवरी, 1929 को उन्नाव जिले के पासाखेड़ा गांव में पंडित श्रीराम द्विवेदी के पुत्र गोविंद मूनिस के रूप में हुआ था, उनकी शिक्षा कानपुर में हुई थी। उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत 1947 में की, जब उनकी पहली लघु कहानी कानपुर के 'दैनिक वीरभारत' के रविवारीय संस्करण में प्रकाशित हुई। उसके बाद कई लेख, लघु कथाएँ और बंगाली से अनुवाद कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रो...

महबूब खान

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#09sep #28may  अभिनेता महबूब खान 🎂09 सितंबर 1907, बिलीमोरा  ⚰️मृत्यु : 28 मई 1964,  मुंबई बच्चे: ।साजिद खान, इकबाल खान   पत्नी: सरदार अख्तर (विवा. 1942–1964) खान का जन्म 9 सितंबर 1907 को सूरत राज्य (अब गुजरात ) के गांडीवी तालुका के बिलिमोरा में महबूब खान रमजान खान के रूप में हुआ था। भारतीय फिल्म जगत के इतिहास में अनेक बड़े नाम हुए हैं, इनमे से एक नाम महबूब ख़ान भी है जो कभी भी भुलाया नहीं जा सकता, महबूब खान ने समाज के समस्याओं से जुड़े विषयों को अपनी फिल्मों के ज़रिय लोगों तक पहुँचाया, वो समाजवादी सिनेमा का दौर था, उस समय अंग्रेज़ों से मुकाबला और भारतीय समाज के अंदर के विद्रोह को बहुत शानदार तरीके से पेश करने वाले महबूब खान ने मदर इंडिया फिल्म के ज़रिये इतिहास रच दिया था, यह फिल्म देश विदेशों में बहुत मशहूर हुई थी हिंदी सिनेमा के 100 से भी अधिक वर्ष का इतिहास मूल रूप से प्रेम के चित्रण का इतिहास रहा है | फिल्मो में तो नायक-नायिका का प्यार हमेशा दिखाया जाता है लेकिन कुछ ऐसे फ़िल्मकार भी रहे है जो पर्दे पर नायिका का प्यार दिखाते दिखाते अंत में पर्दे के पीछे ही नायिका के...

विट्ठल भाई पटेल

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#07sep #21may  विट्ठलभाई पटेल  🎂21 मई 1936 सागर , मध्य प्रांत और बरार , ब्रिटिश भारत ⚰️07 सितंबर 2013  (आयु 77) सागर , मध्य प्रदेश , भारत राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बच्चे 1 बेटा और 2 बेटियां पेशा भारतीय कवि, सामाजिक कार्यकर्ता, गीतकार और वरिष्ठ कांग्रेस नेता एक भारतीय कवि, गीतकार और वरिष्ठ कांग्रेस नेता थे, जो सामाजिक सेवाओं और राजनीति में अपने योगदान के साथ-साथ कई हिंदी फिल्मी गीतों के लिए जाने जाते थे, जिनमें 1973 की फिल्म बॉबी का "ना माँगू सोना चाँदी" और "झूठ बोले कौवा काटे" शामिल हैं ।वे सागर, मध्य प्रदेश , भारत से थे जहाँ उन्होंने अपना अधिकांश जीवन बिताया। उन्होंने हिंदी और बुंदेली में लिखा । विट्ठलभाई एक प्रसिद्ध राजनेता थे जिन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र सुरखी से दो बार मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए जीत हासिल की। ​​आज की पीढ़ी भले ही गीतकार विट्ठल भाई पटेल का नाम न जानती हो लेकिन राज कपूर की फिल्म 'बॉबी' के दो गाने विट्ठल भाई पटेल ने लिखे थे। इस फिल्म में दो गाने लिखे गए 'झूठ बोले कौवा काटे' और 'ना मंगू सोना चांदी, ना मंगू हीरा म...

पंडित किशन जी महाराज

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#03sep #04may  पंडित किशन महाराज जन्म 03 सितंबर, 1923 जन्म भूमि काशी, उत्तर प्रदेश मृत्यु 04 मई, 2008 मृत्यु स्थान वाराणसी अभिभावक पंडित हरि महाराज कर्म भूमि भारत कर्म-क्षेत्र तबला वादक पुरस्कार-उपाधि पद्मश्री, पद्म विभूषण, संगीत नाटक अकादमी सम्मान प्रसिद्धि तबला वादक नागरिकता भारतीय अन्य जानकारी किशन महाराज तबले के उस्ताद होने के साथ साथ मूर्तिकार, चित्रकार, वीर रस के कवि और ज्योतिष के मर्मज्ञ भी थे। पंडित किशन महाराज  महान तबला वादक  पंडित किशन महाराज भारत के सुप्रसिद्ध तबला वादक थे। ये बनारस घराने के वादक थे। इन्हें कला क्षेत्र में योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा सन 1973 में पद्म श्री और सन 2002 में पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था। किशन महाराज तबले के उस्ताद होने के साथ साथ मूर्तिकार,चित्रकार , वीर रस के कवि और ज्योतिष के मर्मज्ञ भी थे। किशन महाराज का जन्म काशी के कबीरचौरा मुहल्ले में 3 सितंबर 1923 को एक संगीतज्ञ के परिवार में हुआ। कृष्ण जन्माष्टमी पर आधी रात को जन्म होने के कारण उनका नाम किशन पड़ा। उन्होंने...

ऋतुपर्णा घोष

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#31aug #30may  ऋतुपर्णो घोष  🎂31 अगस्त 1963,  कोलकाता ⚰️30 मई 2013, कोलकाता माता-पिता: सुनील घोष भाई: इन्द्रनील घोष बंगाली फ़िल्मों के प्रसिद्ध निर्देशक, लेखक और अभिनेता थे। 'चोखेर बाली', 'रेनकोट' और 'अबोहोमन' जैसी फ़िल्मों के लिए 'राष्ट्रीय पुरस्कार' विजेता ऋतुपर्णो घोष की ख्याति राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जगत् में थी। उन्होंने और उनकी फ़िल्मों ने रिकॉर्ड बारह 'राष्ट्रीय पुरस्कार' जीते थे। ऋतुपर्णो घोष उन निर्देशकों में से एक थे, जो फ़िल्म को एक कला मानते थे। व्यवसाय या बॉक्स ऑफिस को ध्यान में रखकर उन्होंने कभी फ़िल्में नहीं बनाईं। उनकी अपनी सोच थी, शैली थी और अपने मिजाज के अनुरूप ही ‍वे फ़िल्में बनाते थे। बहुत कम समय में ही उन्होंने अपनी एक ख़ास पहचान बना ली थी। घोष ने विज्ञापन की दुनिया से अपना व्यवसाय प्रारम्भ किया था और जल्द ही फ़िल्मों की ओर मुड़ गए थे। अपने 19 साल के फ़िल्मी करियर में ऋतुपर्णो घोष ने 19 फ़िल्मों का निर्देशन और तीन फ़िल्मों में अभिनय किया। जन्म तथा शिक्षा ऋतुपर्णो घोष का जन्म 31 अगस्त, 1963 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ...

काजी नजरुल इस्लाम

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#29aug #24may  काज़ी नज़रुल इस्लाम 🎂जन्म 24 मई, 1899 जन्म भूमि ज़िला वर्धमान, पश्चिम बंगाल ⚰️मृत्यु 29 अगस्त, 1976 मृत्यु स्थान ढाका, बांग्लादेश पति/पत्नी प्रमिला देवी भाषा बांग्ला, हिन्दुस्तानी, पर्शियन पुरस्कार-उपाधि 'पद्म भूषण' (1960), 'इंडिपेडेन्ट डे अवॉर्ड' (1977) प्रसिद्धि बांग्ला कवि, साहित्यकार, दार्शनिक नागरिकता बांग्लादेशी अन्य जानकारी काज़ी नज़रुल इस्लाम ने लगभग तीन हज़ार गानों की रचना की और साथ ही अधिकांश को स्वर भी दिया। इनके संगीत के आजकल 'नज़रुल संगीत' या "नज़रुल गीति" नाम से जाना जाता है। परिचय काज़ी नज़रुल इस्लाम का जन्म भारत के पश्चिम बंगाल प्रदेश के वर्धमान ज़िले में आसनसोल के पास चुरुलिया नामक गाँव में एक दरिद्र मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनकी प्राथमिक शिक्षा धार्मिक (मजहबी) शिक्षा के रूप में हुई। किशोरावस्था में विभिन्न थिएटर दलों के साथ काम करते-करते काज़ी नज़रुल इस्लाम ने कविता, नाटक एवं साहित्य के सम्बन्ध में सम्यक ज्ञान प्राप्त किया। राष्ट्रीय कवि काज़ी नज़रुल इस्लाम बांग्ला भाषा के अन्यतम साहित्यकार, देशप्रेमी तथा बांग्ला देश...

विक्रमजीत पाल कंवर

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#29aug #01may  बिक्रमजीत कंवरपाल 🎂जन्म 29 अगस्त, 1968 जन्म भूमि सोलन, हिमाचल प्रदेश ⚰️मृत्यु 01 मई, 2021 मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र कर्म भूमि भारत कर्म-क्षेत्र भारतीय सेना, हिन्दी सिनेमा मुख्य फ़िल्में 'पेज 3', 'पाप, करम', 'कॉरपोरेट', 'क्या लव स्टोरी है', 'खुशबू', 'हाइजैक', 'थैंक्स मां', 'रॉकेट सिंह', 'आरक्षण', 'माई फ्रेंड पिंटो' आदि। प्रसिद्धि अभिनेता नागरिकता भारतीय अन्य जानकारी बिक्रमजीत कंवरपाल ने पढ़ाई पूरी करने के बाद 1989 में भारतीय सेना ज्वॉइन की थी। सेना में अपनी बहादुरी और साहस का पर‍िचय देने के बाद 2002 में बतौर मेजर वे सेना से रिटायर हुए। बिक्रमजीत कंवरपाल  जन्म- 29 अगस्त, 1968; मृत्यु- 1 मई, 2021) हिन्दी फ़िल्मों के अभिनेता थे। उन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया था। बिक्रमजीत कंवरपाल एक्टर बनने से पहले भारतीय सेना के अफसर रह चुके थे। उन्होंने आर्मी से रिटायर होने के बाद साल 2003 में अपना एक्टिंग डेब्यू किया। न्होंने 'पेज 3', 'रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर', 'आरक्षण...