गामा पहलवान
#22may
#23may
गामा पहलवान
जन्मनाम
ग़ुलाम मुहम्मद बक़्श
🎂: 22 मई 1878,
अमृतसर
⚰️: 23 मई 1960, लाहौर, पाकिस्तान
वज़न: 113 kg
बच्चे: असलम पहलवान
पत्नी: वज़ीर बेगम
लंबाई: 1.71 मी
राष्ट्रीयता: पाकिस्तानी
गुलाम मौहम्मद बख्श का जन्म 22 मई 1878 को अमृतसर के जब्बोवाल गाँव के एक कश्मीरी मुस्लिम पंडित परिवार में हुआ । इनके परिवार में स्वयं ही विश्वप्रसिद्ध पहलवान हुए थे । गामा कि दो पत्नियां थीं ,एक पाकिस्तान में और दूसरी बड़ोदा गुजरात में। जब गामा छः साल के थे, तो उनके पिता मौहम्मद अज़ीज़ बख्श का निधन हो गया । उसके बाद उनके नानाजी नुन पहलवान ने उनका पालन किया । बाद में उनके निधन के बाद उनके मामाजी इड़ा पहलवान ने उनका पालन किया और उनकी ही देखरेख में गामा ने पहलवानी की शिक्षा प्रारंभ की।
गामा ने पहलवानी की शिक्षा अपने मामा इड़ा पहलवान से प्रारंभ की। आगे चलकर इनके अभ्यास में काफी बदलाव आए। जैसे कि, यूँ तो बाकी पहलवानों कि तरह उनका अभ्यास भी सामान्य ही था,परंतु इस सामान्यता में भी असामान्यता यह थी कि वे प्रत्येक मैच एक से नहीं बल्कि चालिस प्रतिद्वंदीयों के साथ एक-साथ लड़ते थे और उन्हें पराजित भी करते थे । गामा रोज़ तीस से पैंतालीस मिनट में, सौ किलो कि हस्ली पहन कर पाँच हजार बैठक लगाते थे, और उसी हस्ली को पहन कर उतने ही समय में तीन हजार दंड लगाते थे । वे रोज़
डेढ़ पौंड बादाम मिश्रण (बादाम पेस्ट)
दस लीटर दूध
मौसमी फलों के तीन टोकरे
आधा लीटर घी
दो देसी मटन
छः देसी चिकन
छः पौंड मक्खन
फलों का रस
एवं अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ अपनी रोज़ कि खुराक के रुप में लिया करते थे ।
गामा ने अपने पहलवानी करियर के शुरुआत महज़ 10 वर्ष की आयु से की थी। सन 1888 में जब जोधपुर में भारतवर्ष के बड़े-बड़े नामी-गिरामी पहलवानों को बुलाया जा रहा था, तब उनमें से एक नाम गामा पहलवान का भी था । यह प्रतियोगिता अत्याधिक थकाने वाले व्यायाम की थी। लगभग 450 पहलवानों के बीच 10 वर्ष के गामा पहलवान प्रथम 15 में आए थे । इस पर जोधपुर के महाराज ने उस प्रतियोगिता का विजयी उन्हें ही घोषित किया। बाद में दतिया के महाराज ने उनका पालन पोषण आरंभ किया ।
गामा पहलवान की मृत्यु 23 मई 1960 को लाहौर, पाकिस्तान में हुई। वे काफी समय से बीमार थे ।उनकी बीमारी का सारा खर्चा पाकिस्तान सरकार ने उठाया और उन्हें कुछ जमीनें भी दी थीं।
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