वेद रही

प्रसिद्ध लेखक फ़िल्म निर्देशक
वेद राही
🎂22 मई 1933
किताबें: वेदपाल "दीप": जीवन, अवदान ते कृतित्व, अन्धी सुरंग, Soca,
माता-पिता: मुल्क राज सराफ
हिन्दी और डोगरी के साहित्यकार तथा फिल्म निर्देशक हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर के जीवन पर आधारित फिल्म वीर-सावरकर बनाई। वेद राही ने दूरदर्शन धारावाहिक गुल गुलशन गुलफाम का भी निर्देशन किया।

वेद राही का जन्म 22 मई 1933 को जम्मू कश्मीर में हुआ था। इनके पिता का नाम लाला मुल्कराज सराफ था जो जम्मू से “रणबीर” नाम का समाचार-पत्र निकलते थे। राही जी को बचपन से ही लिखने का शौक था। उन्होंने पहले उर्दू में लिखना आरम्भ किया और फिर हिंदी और डोगरी भाषा में भी लिखने लगे। उनकी अब तक की कुछ मशहूर कहानियां है -
काले हत्थे (1958),
आले (1982),
क्रॉस फायरिंग। उनके प्रमुख उपन्यासों में
झाड़ू बेडी द पत्तन (1960)
, परेड (1982),
टूटी हुई डोर (1980) ,
गर्म जून आदि।

वेद राही ने फिल्मी संसार में कदम रामानंद सागर के कारण रखा जिनके साथ जुड़ रहकर उन्होंने लगभग 25 हिंदी फिल्मों के लिए कहानिया, डायलॉग और स्क्रीन राइटिंग की। इन्होने कई फिल्में की जैसे
वीर सावरकर (1982),
बेज़ुबान (1976),
चरस (1975),
संन्यासी (1972),
बे-ईमान (1972),
मोम की गुड़िया (1971),
आप आये बहार आई (1971 ), पराया धन (1970 ),
पवित्र पापी (1966 ), '
यह रात फिर न आएगी' आदि। इसके अलावा उन्होंने 9 फिल्मे और सीरियल का निर्देशन किया एहसास (टीवी सीरीज ) (1994 ), रिश्ते
(टीवी सीरीज) (1987 ), ज़िन्दगी (टीवी सीरीज)(1987), गुल गुलशन गुलफाम (टीवी सीरीज) (1984), नादानियाँ (1980), काली घटा (1973), प्रेम पर्वत (1972), दरार आदि। इसके अलावा इन्होने काली घटा नामक फिल्म निर्मित भी की।

राही ने डोगरी भाषा में विभिन्न लघु कथाएँ प्रकाशित कीं और नरेंद्र खजूरिया, मदन मोहन शर्मा और प्रोफेसर नीलांबर देव शर्मा के साथ उन्हें आधुनिक समय के प्रसिद्ध डोगरी लेखक माना जाता है।

उनकी पुस्तकों का कई अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है। सिंधी भाषा में लाल देद का अनुवाद (सरिता शर्मा द्वारा लाल देद (2015) और रतन लाल शांत द्वारा लाल देद (2015)) और आले का कश्मीरी भाषा में अनुवाद (अब्दुल गनी बेग अतहर द्वारा लखाकर यिन वापास (2010) के रूप में) किया गया है। क्रमशः सिंधी और कश्मीरी श्रेणियों में साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार भी प्राप्त हुआ


🎥फिल्में

1966 - पटकथा लेखक के रूप में ये रात फिर ना आयेगी
1970 - पवित्र पापी संवाद और पटकथा लेखिका के रूप में
1971 - लेखक के रूप में आप आये बहार आये
1971 - पवित्र पापी पटकथा लेखक के रूप में
1972 - संवाद लेखक के रूप में बे-ईमान
1972 - संवाद लेखक के रूप में मोम की गुड़िया
1973 - प्रेम पर्वत निर्देशक के रूप में
1975 - सन्यासी संवाद लेखक के रूप में
1976 - चरस संवाद लेखक के रूप में
1980 - काली घटा निर्देशक, निर्माता और लेखक के रूप में
1982 - बेजुबान संवाद लेखक के रूप में
2001 - वीर सावरकर निर्देशक, लेखक के रूप में

पुस्तकें

काले हत्थे - उपन्यास
गर्भ जून - उपन्यास
लाल डेड - उपन्यास
आले - उपन्यास
इक जर्नलिस्ट दी आत्मकथा - मुल्क राज सराफ की जीवनी
हाद बेदी ते पट्टन - उपन्यास
अन्धी सुरंग - उपन्यास
एक था चित्रकार, एक था राजा - लघु कथाएँ
मौत - लघु कथाएँ
सोच
टेलीविजन

गुल गुलशन गुलफाम: दूरदर्शन
मीराबाई: दूरदर्शन

पुरस्कार

1983 - लघु कहानी संग्रह 'आले ' के लिए डोगरी के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता ।
2011 - महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार (2014 में प्रदान किया गया पुरस्कार)
2019 - कुसुमाग्रज राष्ट्रीय साहित्य पुरस्कार

Comments

Popular posts from this blog

अंत माने

पृथ्वी राज कपूर (मृत्यु)

असित सेन