विट्ठल भाई पटेल


#21may
#07sep
झूठ बोले कौव्वा काटे ,ना मांगू सोना चांदी जैसे गानो को लिखने वाले प्रसिद्ध फ़िल्म गीतकार, कवि एवं राजनेता
विट्ठलभाई पटेल

🎂21 मई 1936 
⚰️07 सितंबर 2013

एक भारतीय कवि, गीतकार और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता थे, जिन्हें सामाजिक सेवाओं और राजनीति में उनके योगदान के साथ-साथ "ना मांगू सोना चांदी" और "  झूठ बोले कौवा काटे" जैसे गानो के लिए जाना जाता है बॉबी फ़िल्म 1973 में रिलीज हुई थी
वह सागर, मध्य प्रदेश, के रहने वाले थे जहाँ उन्होंने अपना अधिकांश जीवन व्यतीत किया।  उन्होंने हिंदी और बुंदेली में लिखा।

लंबी बीमारी के बाद 7 सितंबर 2013 को उनका निधन हो गया वह 75 वर्ष के थे।
पटेल दो बार मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए सागर, मध्य प्रदेश निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे।  वह अर्जुन सिंह, मोतीलाल वोरा और श्यामा चरण शुक्ल के मंत्रिमंडल में मंत्री थे।
पटेल ने 55 हिंदी फिल्मी गीतों के बोल लिखे, साथ ही पांच कविता संग्रह भी लिखे।

विट्ठल भाई पटेल 
वे एक बेहतरीन गीतकार थे, बल्कि अच्छे इंसान, ईमानदार और सुचिता वाले राजनेता भी थे। फिल्मी जगत से जुड़ाव के बावजूद सादगी उनके रग-रग में थी। उनके दोस्त, जानने वाले हमेशा उनके इस गुण के कायल रहे हैं।
हमारी खास प्रस्तुति में हमने विटठ्लभाई व उनके जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों को चित्रों के जरिए संजोने की कोशिश की है। विट्ठलभाई कैसे थे? उनके जीवन का गीतकार, कलाकार, राजनेता, विचारक, समाजसेवी, साहित्यकार फलसफा क्या था? इसके जवाब भी विट्ठलभाई के शब्दों में ही हैं...

21 मई 1936 को जन्मे। सागर विश्वविद्यालय से बी-कॉम। 1960-70 के दशक में बॉबी, सत्यम-शिवम-सुंदरम, सन्यासी, विश्वनाथ सहित कई फिल्मों में 40 से अधिक गीत लिखे। हिंदी सिनेमा के 'शो-मेन' राजकपूर के दोस्त एवं पसंदीदा गीतकार।
1969 में पहली कार रैली के विजेता। मध्यप्रदेश सरकार में 1982 से 1989 तक मंत्री रहे। मुंबई-दिल्ली-सागर तक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय। 550 दिन सफाई अभियान एवं स्व. किशोर कुमार की समाधि बनाने के लिए 1 रुपए दान अभियान से चर्चित हुए। प्यासे घट, दीवारों के खिलाफ, दूर तक छाया नहीं, अंत नहीं आरंभ आदि... सहित कई पुस्तकें लिखीं।
अपनी धरती-अपने लाल: राजकपूर ने कहा और गीतकार विट्ठल भाई ने लिख दिया, झूठ बोले कौवा काटे काले कौवे से डरियो..
लंबे समय तक पृथक बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के दौरान विट्ठल भाई पटेल के साथ रहे झांसी निवासी हरिमोहन विश्वकर्मा बताते हैं कि सत्तर के दशक में विट्ठल भाई की मुंबई की मायानगरी के क्षितिज पर धूम थी।

विट्ठलभाई पटेल के आग्रह पर राजकपूर ने अपनी फिल्म 'तीसरी कसम' की शूटिंग सागर जिले के खिमलासा में की। वे खुद भी कुछ दिनों तक यहां विट्ठलभाई के साथ रहे। फिल्म जगत से जुड़ी कई बड़ी हस्तियों का उन्हें साथ मिला।
राजनीति में गांधी परिवार और फिल्म जगत में कपूर परिवार से उनके बेहद नजदीकी रिश्ते रहे। श्री पटेल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का ही यह कमाल था कि सागर नगर में देश के कई नामी कलाकार, साहित्यकार अनवरत रूप से यहां आते रहे।

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